असर उस को ज़रा नहीं होता मोमिन ख़ाँ मोमिन
असर उस को ज़रा नहीं होता
रंज राहत-फ़ज़ा नहीं होता
बेवफ़ा कहने की शिकायत है
तो भी वादा-वफ़ा नहीं होता
ज़िक्र-ए-अग़्यार से हुआ मालूम
हर्फ़-ए-नासेह बुरा नहीं होता
किस को है ज़ौक़-ए-तल्ख़-कामी लेक
जंग बिन कुछ मज़ा नहीं होता
तुम हमारे किसी तरह न हुए
वर्ना दुनिया में क्या नहीं होता
उस ने क्या जाने क्या किया ले कर
दिल किसी काम का नहीं होता
इम्तिहाँ कीजिए मिरा जब तक
शौक़ ज़ोर-आज़मा नहीं होता
एक दुश्मन कि चर्ख़ है न रहे
तुझ से ये ऐ दुआ नहीं होता
आह तूल-ए-अमल है रोज़-फ़ुज़ूँ
गरचे इक मुद्दआ नहीं होता
तुम मिरे पास होते हो गोया
जब कोई दूसरा नहीं होता
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